Green Apple Singh
@greenapple777
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Presence not equal to endorsement सोचता हूं गहरी नीन्द सो जाऊँ, सो कर उठने की वजह तो हो। सोचता हूं खूब पैसा कमाऊँ, सही खर्च करने की वजह तो हो। ये जो बच्चे भूखे फिरते हैं, देश को राष्ट्र कहने की वजह तो हो। गाय को मां का दर्जा दे कर, गली गली कूड़ा खाने की वजह तो हो। चोरी, गुन्डागर्दी, बलात्कार आम हैं, इनके खिलाफ आवाज़ बुलंद करने की, या फिर की सवाल करने की, बहुत मुश्किल ही सही पर वजह तो हो। जस ये शिकवे शिकायतों का नहीं नफरतों का दौर है, हर चेहरे पर मुखौटा है, हर दिल में चोर है। जस जिन्हें नाज़ है हिन्द पर वो कहां हैं ये फूलों के गजरे, ये पीकों के छींटे ये बेबाक नज़रें, ये गुस्ताख फ़िकरे ये ढलके बदन और ये बीमार चेहरे जिन्हें नाज़ है हिन्द पर वो कहां हैं.. साहिर *** इल्म नहीं है खुद मुझे बेखुदा होने का, ईबादत करनी है मेरी तो मेरा बुत जला दे। जस